
दूरियाँ नज़दीकियाँ शायरी सुविचार, स्टेटस, मैसेज हिन्दी
दूरियां शायरी
दूरियों से फर्क नहीं पड़ता,
बात तो दिल की नजदीकियों की होती है,
दिल के रिश्ते तो किस्मत से बनते हैं
वर्ना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है ।
रहें दूरियाँ तो क्या हुआ याद नज़रों से नहीं, दिल से किया जाता है ।

कौन कहता है कि दूरियां
किलोमीटरों में नापी जाती हैं,
खुद से मिलने में भी उम्र गुज़र जाती है ।
कोई हाथ न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फासले से मिला करो ।
जब मिलो किसी से तो जरा दूर की यारी रखना
अक्सर जान लेवा होते हैं, सीने से लगाने वाले ।

दूरियों का गम नहीं अगर फासले दिल में ना हों
और नजदीकियाँ बेकार हैं अगर जगह दिल में ना हो।
जरुरी हैं कुछ फासले भी कद्र नजदीकियों की समझने के लिए ।
रखा करो नज़दीकियाँ, जिंदगी का भरोसा नहीं
फिर कहोगे चुपचाप चले गए और बताया भी नहीं ।

दूरियाँ ही नजदीक लाती हैं
दूरियाँ ही एक दूजे की याद दिलाती हैं
दूर होकर भी कोई कितना करीब है।
दूरियाँ ही इस बात का अहसास दिलाती हैं ।
दिल में आप हो और कोई खास कैसे होगा
यादों में आपके सिवा कोई पास कैसे होगा
हिचकियाँ कहती हैं आप याद करते हो
पर बोलोगे नहीं तो मुझे एहसास कैसे होगा ।

कितना अजीब है ये फलसफा जिंदगी का
दूरियाँ सिखाती हैं कि नज़दीकियाँ क्या होती हैं।
वक्त नूर को बेनूर कर देता है,
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,
कौन चाहता है अपने से दूर होना,
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है ।
दूरियाँ सुविचार

लोग कहते हैं जब कोई अपना
दूर चला जाए तो तकलीफ होती है,
परंतु असली तकलीफ वो होती है,
जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना ले ।
चंद फासला जरूरी रखिए
हर रिश्ते के दरमियान
क्योंकि नहीं भूलती दो चीजें
चाहे जितना भुलाओ
एक घाव और दूसरा लगाव ।
जिंदगी की बैंक में जब ” प्यार” का
“बैलेंस” कम हो जाता है तब
“हंसी खुशी” के चेक बाउंस होने लगते है…
इसलिए हमेशा अपनों के साथ नज़दीकियां बनाए रखिए और
अपनो को प्यार बांटते रहें ।

ईश्वर, सिर्फ मिलाने का काम करता है,
संबंधों में नजदीकियाँ या दूरियाँ बढ़ाने का
काम व्यक्ति स्वयं करता है ।
दूरियाँ, कभी किसी रिश्ते को नहीं तोड़ सकती, और
नजदीकियाँ, कभी किसी रिश्ते को नहीं बना सकती,
अगर चाहत सच्चे दिल से हो तो दोस्त दोस्त ही रहते हैं,
फिर चाहे वो मीलों दूर ही क्यों न हो ।

जब रिश्ते में दूरियाँ बढ़ती हैं तो गलतफहमी भी बढ़ जाती है
फिर आगे वाले को वो भी सुनाई देता है जो हम कहते भी नहीं ।
किसी से सिर्फ उतना ही दूर होना जिससे कि उसे
आपकी अहमियत का एहसास हो जाये,
पर इतना भी दूर मत होना कि वो
आपके बिना जीना ही सीख ले।
फर्क मीलों की दूरी में नहीं,
सोच में होने वाली दूरी से पड़ता है ।

भावनायें ही तो है,
जो दूर रहकर भी, अपनों की
नज़दीकियों का अहसास कराती हैं,
वर्ना दूरी तो दोनों आँखों के बीच भी है।
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